A2Z सभी खबर सभी जिले कीअन्य खबरेछत्तीसगढ़ताज़ा खबरमहासमुंद

*विकास का संकल्प बनाम विरोध की राजनीति बजट ने देश को दिशा दी, विपक्ष की हताशा उजागर की**

*विकास का संकल्प बनाम विरोध की राजनीति बजट ने देश को दिशा दी, विपक्ष की हताशा उजागर की**

**विकास का संकल्प बनाम विरोध की राजनीति
बजट ने देश को दिशा दी, विपक्ष की हताशा उजागर की**

IMG 20260201 WA0432

तिलक राम पटेल संपादक महासमुन्द वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल समृद्ध भारत अखबार
देश का आम बजट केवल आंकड़ों, प्रतिशतों और घोषणाओं का दस्तावेज़ नहीं होता। वह दरअसल उस सरकार की नीयत, सोच और राष्ट्र के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सार्वजनिक प्रमाण होता है। हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार केवल सत्ता चलाने में नहीं, बल्कि राष्ट्र को दिशा देने में विश्वास रखती है। यह बजट शब्दों का शोर नहीं, बल्कि कार्यों की स्पष्ट घोषणा है—जहाँ नीति है, नियत है और नेतृत्व है।
आज जब पूरा देश विकसित भारत की ओर आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहा है, तब विपक्ष की राजनीति फिर उसी पुराने ढर्रे पर लौट आई है—बिना पढ़े, बिना समझे, बिना जिम्मेदारी के “जनविरोधी” का शोर। यह आलोचना किसी वैचारिक मतभेद से नहीं, बल्कि उस हताशा से जन्मी है, जो वर्षों से सत्ता से दूर बैठी राजनीति की पहचान बन चुकी है। विपक्ष को आपत्ति बजट की धाराओं से नहीं है, बल्कि उस नेतृत्व से है, जिसने निर्णय लेने की आदत को फिर से राजनीति का केंद्र बनाया है।
यह बजट नहीं, नए भारत का विज़न डॉक्यूमेंट है
यह बजट किसी एक वर्ग को खुश करने के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र को सशक्त करने के लिए बनाया गया है। गरीब, किसान, महिला, युवा, मध्यम वर्ग और उद्यमी—हर वर्ग को साथ लेकर चलने की स्पष्ट मंशा इस बजट की हर पंक्ति में दिखाई देती है। यह बजट साबित करता है कि भाजपा सरकार तात्कालिक तालियों के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्र निर्माण के लिए काम कर रही है।
जहाँ पहले बजट का मतलब चुनावी जुमले हुआ करता था, आज बजट का अर्थ है—रोडमैप, टाइमलाइन और परिणाम। यही मूल अंतर है भाजपा की नीति और विपक्ष की राजनीति में।
इन्फ्रास्ट्रक्चर: विकास की रीढ़, आत्मनिर्भरता की नींव
इस बजट में बुनियादी ढांचे पर किया गया निवेश केवल कंक्रीट और स्टील का मामला नहीं है। सड़क, रेल, हवाई अड्डे, डिजिटल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स—ये सब मिलकर रोज़गार, निवेश और सामाजिक संतुलन की मजबूत नींव रखते हैं।
जब सड़क गाँव तक पहुँचती है, तो केवल दूरी नहीं घटती—किसान को बाज़ार मिलता है, युवा को रोज़गार मिलता है और क्षेत्रीय असमानता टूटती है। यही कारण है कि भाजपा सरकार का विकास मॉडल स्थायी है, आत्मनिर्भर है और परिणाम देने वाला है। इसके विपरीत विपक्ष आज भी विकास को केवल घोषणाओं और फाइलों तक सीमित रखने की मानसिकता में उलझा हुआ है।
किसान: अब राजनीति नहीं, नीति का केंद्र
यह बजट किसान को दया का पात्र नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानता है। आधुनिक कृषि तकनीक, सिंचाई सुविधाएँ, भंडारण, फसल विविधीकरण और बाज़ार तक सीधी पहुँच—ये सभी प्रावधान यह स्पष्ट करते हैं कि सरकार किसान को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, न कि उसे हमेशा सहायता पर निर्भर रखना।
विपक्ष वर्षों तक किसान के नाम पर राजनीति करता रहा, लेकिन स्थायी समाधान देने में असफल रहा। कर्ज़ माफी जैसे अस्थायी उपायों से किसान का भविष्य नहीं बनता। आज जब किसान सम्मान, सुविधा और सुरक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है, तब विपक्ष की बेचैनी स्वाभाविक है।
युवा और मध्यम वर्ग: राष्ट्र निर्माण की असली ताकत
यह बजट युवा भारत की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। कौशल विकास, स्टार्ट-अप, नवाचार और रोजगार सृजन पर ज़ोर यह दिखाता है कि सरकार युवाओं को समस्या नहीं, समाधान मानती है। युवा शक्ति को अवसर देकर ही राष्ट्र मजबूत होता है—यह सोच इस बजट की आत्मा है।
मध्यम वर्ग को मिली राहत यह प्रमाण है कि सरकार ईमानदार करदाताओं के साथ खड़ी है। टैक्स प्रणाली का सरलीकरण, बचत को प्रोत्साहन और आर्थिक स्थिरता—ये वही कदम हैं जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं। विपक्ष आज जिस मध्यम वर्ग की चिंता दिखा रहा है, सत्ता में रहते हुए उसी वर्ग को उसने महंगाई और भ्रष्टाचार के बोझ तले दबा दिया था।
गरीब कल्याण: नारे नहीं, सीधी डिलीवरी
आज देश का गरीब यह नहीं पूछता कि योजना का नाम क्या है, बल्कि यह देखता है कि लाभ सीधे खाते में पहुँचा या नहीं। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं ने यह साबित कर दिया है कि यह सरकार बिचौलियों की राजनीति को खत्म कर चुकी है।
यही पारदर्शिता विपक्ष को सबसे ज़्यादा चुभती है, क्योंकि उसकी राजनीति लंबे समय तक व्यवस्था की खामियों और बिचौलियों पर टिकी रही।
विपक्ष की असली परेशानी: बजट नहीं, नेतृत्व
सच्चाई यह है कि विपक्ष की समस्या यह बजट नहीं है। उसकी समस्या है— एक मजबूत प्रधानमंत्री,
स्पष्ट और निर्णायक नीतियाँ,
और राष्ट्रहित में निर्णय लेने की राजनीतिक इच्छाशक्ति।
जो राजनीति केवल विरोध पर टिकी हो, उसे हर सकारात्मक कदम भी नकारात्मक दिखाई देता है। लेकिन देश की जनता अब समझ चुकी है कि कौन विकास का पक्षधर है और कौन केवल सत्ता की लालसा में शोर मचाता है।
छत्तीसगढ़ और पिछड़ा वर्ग: नए अवसरों का द्वार
यह बजट छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए विशेष महत्व रखता है। कृषि, खनिज आधारित उद्योग, लघु एवं मध्यम उद्यम और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने से यहाँ के युवाओं, किसानों और पिछड़ा वर्ग के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
पिछड़ा वर्ग, जिसे दशकों तक केवल वोट बैंक समझा गया, आज नीतियों के केंद्र में है। यह बदलाव केवल भाजपा सरकार की स्पष्ट, ईमानदार और राष्ट्रवादी सोच का परिणाम है।
निष्कर्ष: इतिहास में दर्ज होगा यह बजट
यह बजट उन्हें पसंद आएगा जो भारत को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं। जिन्हें भ्रम, नकारात्मकता और ठहराव की राजनीति में विश्वास है, उन्हें यह स्वाभाविक रूप से असहज करेगा। भारत अब पीछे मुड़कर देखने वाला देश नहीं है।
यह बजट नए भारत की घोषणा है—जहाँ विकास है, विश्वास है और स्पष्ट दिशा है।
मैं इस दूरदर्शी, साहसिक और जनकल्याणकारी बजट के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी एवं वित्त मंत्री जी का अभिनंदन करता हूँ और पूरे विश्वास के साथ कहता हूँ कि यह बजट भारत को समृद्धि, मजबूती और वैश्विक सम्मान की नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।
— शंकर लाल अग्रवाल
संगठन प्रभारी, सारंगढ़

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!